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मैं देश बचाने आया हूँ

          मैं देश बचाने आया हूँ पहन वर्दी और बांध तिरंगा सर पे वतन की रक्षा के लिए निकल पड़ा हूँ घर से होली दीवाली ईद मुहर्रम  वतन के साथ मनाने आया हूँ दूर रहो ऐ देश के दुश्मनों मैं देश बचाने आया हूँ। दुश्मनों का मुंह काला होगा जिस देश का ऐसा रखवाला होगा न झुकेगा ये सर दुश्मनों के आगे  लहू से मातृभूमि सींचने आया हूँ दूर रहो ऐ देश के दुश्मनों मैं देश बचाने आया हूँ। हिमालय की तरह अटल और गंगा जैसी सोच है निर्मल तेरे जैसे तूफानों के आगे मैं चट्टान बनकर छाया हूँ। वार करूँगा तो सीने पर ना पीठ पर खंजर मारने आया हूँ दूर रहो ऐ देश के दुश्मनों  मैं देश बचाने आया हूँ। डर गया मेरे हौसले से जो निहत्था देखकर वार किया शर्म नहीं तेरे आँखों में जो मानवता का संहार किया। खून से लतपत पड़ा भूमि पर भारत माँ को आखिरी सलाम किया माँ से वापस मिलने का मैं वादा करके आया था ना भूलना मेरी शहादत साथियों मैं देश बचाने आया था। तेरी इंतजार की घड़ियां खत्म हुई माँ मैं अपना वादा निभाया हूँ देख तिरंगे को माँ मैं  क...

मैं अपनी व्यथा सुनाता हूँ

             मैं अपनी व्यथा सुनता हूँ मैं सरकारी स्कूल का विद्यार्थी हूँ मैं अपनी व्यथा सुनता हूँ। वर्ष में होते तीन सौ पैंसठ दिन क्लास किये सिर्फ पैंसठ दिन बाकी दिन दुकान में बैठकर पिताजी का हाथ बंटाता हूँ मैं सरकारी स्कूल का विद्यार्थी हूँ मैं अपनी व्यथा सुनाता हूँ। कई महीने बीत गये किताबें नहीं बटीं विद्यालय में बस कुछ महीने बाकी हैं फाइनल एग्जाम आने में किताबें मिली तो सोचा कि पढ़ लूंगा तो कुछ मिलेगा ज्ञान डॉक्टर इंजीनियर भले न बनूं पर बन तो सकूँगा अच्छा इंसान भोजन मिलता है विद्यालय में ये सोचकर विद्यालय जाता हूँ मैं सरकारी स्कूल का विद्यार्थी हूँ मैं अपनी व्यथा सुनाता हूँ। गया विद्यालय तो सिर्फ दो शिक्षक थे बाकी सारे नदारद थे पता चला की कुछ वीक्षक  कुछ इलेक्शन तो कुछ बी एल ओ ड्यूटी में कार्यरत थे छात्रवृत्ति पोशाक के लालच में रोज विद्यालय जाता हूँ मैं सरकारी स्कूल का विद्यार्थी हूँ मैं अपनी व्यथा सुनाता हूँ।