वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई
वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई तीर्थ नगरी बनारस में,जन्मी एक असाधारण कन्या। अदम्य साहसी, छैल छबीली,मनु नाम की एक सुकन्या। विलक्षण प्रतिभा की धनी ,साधारण नहीं वो नारी थी, बरछी, ढाल कृपाण से खेलती , करती घुड़सवारी थी। पेशवा बाजीराव के दरबार में ,उसने अपना बचपन बिताया, तात्या टोपे,नाना साहेब ने , तीरंदाजी,तलवारबाजी सिखाया। हुआ विवाह गंगाधर राव के साथ, मणिकर्णिका बनी महारानी, नाम पड़ा फिर लक्ष्मी बाई, मर्दानी कहलाई तब झांसी की रानी। जन्म दिया एक पुत्र को ,जो गया तुरंत स्वर्ग सिधार, लिया गोद एक पुत्र,पर महाराज की सेहत में ना हुआ सुधार। निधन महाराज का असहनीय था पर, घबराई नहीं महारानी , दत्तक पुत्र के अधिकार के लिए, लड़ी झांसी की रानी । नहीं दूंगी अपनी झांसी,कर दिया खुलकर ऐलान, आई शामत अंग्रेजों की तब ,झांसी में जब छिड़ा संग्राम। बांध पीठ पर पुत्र दामोदर,होकर अकेले घोड़े पर सवार, ...