आत्महत्या: समस्या का समाधान नहीं
आत्महत्या : समस्या का समाधान नहीं
मैंने कई बार ऐसे न्यूज़ पढ़े हैं कि कोई मां पिता की डांट से बच्चे ने सुसाइड कर लिया ,तो कभी रिजल्ट ठीक नहीं आया तो ,तो कभी किसी अन्य भी कारण से।बात ये नहीं कि सुसाइड किस कारण से किया ,गंभीर बात ये सोचने वाली है कि क्यों हम ये नहीं समझते की आत्महत्या कोई गलती नहीं जिसे सुधारा जा सकता है।जिंदगी बार बार नहीं मिलती जिसे जब चाहे खत्म कर लें। हम जिंदा रहेगें तो जंग लड़ेंगें,लेकिन जिंदगी की ही जंग हम खुद हार जायेंगे तो कैसे अपनी लड़ाई लड़ेंगें। हम सब थोड़ी सी भी परेशानी से व्याकुल हो जाते हैं,एक बार उनको देखिए जिनके पास रहने का छत भी नहीं,खाने को भोजन भी नहीं,फिर भी जीने की इच्छा है।उनसे हमें सीखने की जरूरत है।
मुश्किलें तो बचपन से ही आनी शुरू हो जाती हैं,जो आपको जीना सिखाती हैं।आप उन बच्चों को देखो जो ठीक से अभी चलना नहीं सीखे,कभी सीढ़ी से गिर जाते हैं,तो क्या बच्चे को सुसाइड कर लेनी चाहिए की उसे चढ़ना नहीं आता। नहीं मुसीबतें हमें और मजबूत बनाती हैं।
अभी देश के हालात पर नजर डालिए,एक ओर जहां कोरोनावायरस से देश जूझ रहा है वहीं दूसरी तरफ अब
पाकिस्तान के साथ साथ चाइना और नेपाल के साथ अभी स्थिति सही नहीं बनी हुई है।सोचो अगर इस समय से घबरा कर हमारे सभी रिस्पॉन्सिबल पोस्ट पर बैठे व्यक्ति सुसाइड कर लें तो क्या सॉल्यूशन मिल जाएगा?नहीं न
छोड़िए हम अपने घर की बात करते हैं,अपने मां बाप को कई बार परेशान होते हुए देखा होगा,सोचिए अगर वो भी समस्या से भागकर सुसाइड कर लें तो आपका क्या होगा?
लेकिन वो ऐसा नहीं करते क्योंकि उन्हें पता है कि हम उनकी जिम्मेदारी हैं,तो बच्चे कब समझेंगे कि हमारे पैरेंट्स भी हमारी जिम्मेदारी हैं।9 महीने वो हमारे आने का इंतजार करते हैं,फिर हमें जीवन जीना सीखाते हैं।उठना ,बैठना ,चलना ,बोलना,
और हम उनकी एक डांट पर सूइसाइड कर लेते हैं,कभी छोटी छोटी समस्या पर,रिजल्ट अच्छा नहीं आया तो,तो कभी आपका फेवरेट कोई स्टार चला गया ।सोचिए कि उन पर क्या असर होता होगा जब उनके बच्चे ऐसा स्टेप उठाते हैं।
हमें ये समझना होगा कि कोई भी समस्या छोटी या बड़ी नहीं है उसे हम बनाते हैं,चाहे छोटी समस्या को बड़ी,या बड़ी समस्या को भी छोटी।ये याद रखें कोई भी समस्या परमानेंट नहीं है,ये केवल आपका एक एंतिहान है।जब हमें कोई तनाव होती है तो
हम उनलोगों पर अधिक ध्यान देने लगते हो जो आपसे नफरत करने हैं उनपर नहीं जो आपसे प्यार करते है।प्यार को कभी नफरत हरा नहीं सकती ये बात हमें समझनी होगी।
हमें ये समझना होगा कि कोई भी समस्या छोटी या बड़ी नहीं है उसे हम बनाते हैं,चाहे छोटी समस्या को बड़ी,या बड़ी समस्या को भी छोटी।ये याद रखें कोई भी समस्या परमानेंट नहीं है,ये केवल आपका एक एंतिहान है।
अंत में केवल इतना कहना चाहूंगी कि जब भी मन में कोई नेगेटिव विचार आए तो उनके बारे में सोचिए जो आपके लिए इंपॉर्टेंट हैं और जिनके लिए आप इंपॉर्टेंट हैं।हम उनके लिए जीना सीखें जो हमारे लिए जीते हैं।
धन्यवाद्
। स्वाति सौरभ। ।
टिप्पणियाँ
आयेदिन हम समाचार पत्रों व सोशल मीडिया पर आत्महत्या के मंजर को देखते है!
अब युवाओ में सहनशक्ति नही रही,जिससे आत्महत्या का ग्राफ बढ़ता जा रहा है,
जीवन मे कुछ लोग स्पेशल होने चाहिए,जिसने हम अपनी द्रवित बातो को शेयर कर सके,
जो हमे हमेशा स्पेशल होने का अहसास दिलाए।
आपके आलेख में समाज व देश मे सकरात्मक ऊर्जा जायेगी, इन्ही अभिलाषा के साथ आपकी
कलम की नोक अनवरत चलती रहे।✍️✍️🇮🇳🇮🇳